Thursday, 25 September 2014

... ; अर्थ... !%

अधूरे मंद छंद विघटन की ये कथा है,
कुछ दिव्यदीप बुझ जाने की व्यथा है,
जहां की जिदो-उम्मिदों मे सना हुआ है,
ये अंधेरा वक्त सक्त और घना हुआ है

हर सफर मे चैनो सुकूं की आस है,
दुर धुमिल झलकती मंजिल की प्यास है,
राह के पथ भटकन मे रमा हुआ है,
इस स्तिथी-परिस्तिथी मे भी जमा हुआ है

हर बार यहाँ तो नया ऱिझन है,
क्यूंकि हर कृत एक नवीन सृजन है,
एक डगर को पार कर मुदित हआ है,
जैसे अगलि मुशकिल के लिए उदित हुआ है

आशा अभिलाशा का मात्र ये खेल है,
जीवन मृत्यु के चक्कर का सब मेल है,
सत्य की खोज़ को ये मष्तिष्क झुका हुआ है,
अनेक यत्न-परयत्न करके भी रुका हुआ है

मंजिल के करीब आने को बहुत जूझा है,
अंत मृत्यु मात्र मंजिल कोई और ना दुजा है,
मेहनत के सागर मे घिरकर पस्त हुआ है,
साथ ही किसमत का सुरज भी अस्त हुआ है

ये पथ घनघोर घटा अनधड सा है
दुख और सुख का केवल खनडर सा है,
दरजनो यादों का ये सागर सा हुआ है ,
ये जीवन झनझटों का गागर सा हुआ है||

Monday, 22 September 2014

।।मतलब।।।

बस कुछ बीती यादें हैं जो साथ हैं आई,
भूली थी जो बातें वो हैं अब क्यूँ संग पाई,
खुल के हँसना जहाँ एक रीत थी हमेशा,
व्यस्त ही सही पर ये वो सौगात अब क्यूँ लाई.

ये शब्द बस उसी का परिणाम ही तो है,
ये लिखाई प्रेमियों को एक सम्मान ही तो है,
खुशी बयान करने का एक ये ही तरीका मेरा,
नहीं तो इस मतलब में क्या तो मेरा क्या है तेरा.

अब तो ये सपना ही सही साथ इसे रहने दो,
मरहन ना लगाओ ये लहू बस यूँ ही बहने दो,
खुशी में मुस्कुराता देखा होगा कईयों को वहाँ,
दर्द में खिलखिलाते बहोत कम ही मिलेंगे यहाँ.

कुछ नहीं मिलेगा तुम्हें अब मुझपे नाराज़ होके,
जाओ अपनी चुनी राह पे और चुनो जाके धोंके,
बस गर थम जाओ तो साथ मेरा पाओगे आगे,
पर चुमंतर हुआ अचानक अगर तुम नींद से जागे.

इतनी कठिन बातें करने की कोई आदत नहीं है,
मुझसे नफरत करें यहाँ सब इतनी इबादत ही है,
अपने दुःख पे ज़िक्र करो तो मरहन बन जाउँगा,
मेरे दर्द में दखल दिया तो दुश्मन बन के आऊँगा.।।

Sunday, 14 September 2014

@! इंतज़ार !;#/

दूर हुआ तो फ़िक्र नहीं पास में भी कदर नहीं,
कुछ कमी मुझमे है या तेरी जरुरत अब बड़ी हुई,
हर बार जब तेरा चेहरा झुका देखता हूँ,
तेरे दूर होने की वजह मुश्किल से समेटता हूँ.

हाँ मेरी जिद्द थी तेरा साथ देने हरदम हर मोड़ में,
अफ़सोस तूने राह ही इतनी सीधी ढुँडी इस होड़ में,
पर कोई सिकवा नहीं तेरे इस कदर छोड़ जाने को,
मैं तो हमेशा रहूँगा ही तेरे सामने हर दर्द मानाने को,

और हाँ बस एक जवाब के लिए जी रहा हूँ,
ज़हर हर पल बस उस हिसाब के लिए पी रहा हूँ,
माना की बदलता है वक़्त हर किसी का यहाँ,
तेरा वक़्त सुधरे उसी का हरपल जतन सी रहा हूँ,

पर याद रखना हमेशा ये बात ज़िन्दगी में,
मुझसा कभी न मिलेगा तुझे इस सदी में,
पर साथ तो देना होगा न किसी ना किसी का,
तो क्यों सता रही है खुद को झूटी खुशी में,

मैं जैसा था वैसा सी हूँ अब भी हर तरह से,
तेरा दर्द मात्र सुन के कराह जाना हर मतलब से...

Friday, 5 September 2014

###Love happens… :!!!

Yeah seriously, had no time for love,
Tried lot, staring hopefully at the cloud,
Felt lonely, also shouted very loud,
Resolute not being in this prank instead,

Found many around this ground,
But captured in that lucky bound,
In the woods or around the tree,
For whom I am here, only is she…

But now an embittered guilt emerged,
Lost all not knowing as of compulsion,
Or that of past, habit or ego urged,
But finally it is start of dark allusion…